सदीयो से जागी आँखो को एक बार सुलाने आ जाओ माना की तुमको

myshayaris

सदीयो से जागी आँखो को, एक बार सुलाने आ जाओ, माना की तुमको प्यार नहीं, नफरत ही जताने आ जाऔ जिस मोङ पे हमको छोङ गये, हम बैठे अब तक सोच रहे क्या भुल हुई क्यो जुदा हुए, बस यह समझाने आ जाओ!   ना जाने क्या सोच कर लहरें साहिल से टकराती हैं; और फिर समंदर में लौट जाती हैं; समझ नहीं आता कि किनारों से बेवफाई करती हैं; या फिर लौट कर समंदर से वफ़ा निभाती हैं।     वो पानी की लहरों पे क्या लिख रहा था; खुदा जाने हरफ-ऐ-दुआ लिख रहा था; महोब्बत में मिली थी…

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