पलकों को जब जब आपने झुकाया है

By | August 11, 2019

detroweb

पलकों को जब-जब आपने झुकाया है,
बस एक ही ख्याल दिल में आया है,
कि जिस खुदा ने तुम्हें बनाया है,
तुम्हें धरती पर भेजकर वो कैसे जी पाया है।

 

 

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तुम हक़ीकत नहीं हो हसरत हो,
जो मिले ख़्वाब में वही दौलत हो,
किस लिए देखती हो आईना,
तुम तो खुदा से भी ज्यादा खूबसूरत हो।

 

 

 

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फूल खिलते हैं बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवां होता है,
दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये फ़साना तो निगाहों से बयाँ होता है।

 

 

 

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हसरत है सिर्फ तुम्हें पाने की,
और कोई ख्वाहिश नहीं इस दीवाने की,
शिकवा मुझे तुमसे नहीं खुदा से है,
क्या ज़रूरत थी, तुम्हें इतना खूबसूरत बनाने की !!

 

 

 

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दर्द हैं दिल में पर इसका ऐहसास नहीं होता,
रोता हैं दिल जब वो पास नहीं होता,
बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में,
और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता!

 

 

 

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देख के तेरी आँखों में , पल पल जिया हु में।
तुझे देख किसी के बाहों मे, हर पल मरा हु मैं।
साथ तेरा जब तक था, जिंदगी से वफ़ा मैं करता था।
अब साथ नही जब तेरा , मैं वफ़ा मौत से करता हूँ।

 

 

 

 

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मत रहो दूर हमसे इतना के अपने फैसले पर अफसोस हो जाये…
कल को शायद ऐसी मुलाकात हो हमारी…
के आप हमसे लिपटकर रोये और हम ख़ामोश हो जाये..

 

 

 

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सांस थम जाती है पर जान नहीं जाती,

दर्द होता है पर आवाज़ नहीं आती,

अजीब लोग है इस ज़माने मैं,

कोई भूल नहीं पाता और किसी को याद नहीं आती.

 

 

 

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जिनकी आँखे आंसुओं से नम नहीं,
क्या समझते हो उसे कोई गम नहीं,
तुम तड़प कर रो दिए तो क्या हुआ,
गम छुपा के हॅसने वाले भी कम नहीं.



3 thoughts on “पलकों को जब जब आपने झुकाया है

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